Friday, March 31, 2023

“” सियासत का मतलब सिर्फ राज की चाह “”

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“” Politics Means only the Desire for Rule “
“” सियासत का मतलब सिर्फ राज की चाह “”

सियासत भी मानस क्या खूब ही रंग दिखाती है ,
इसके रंग देख गिरगिट को भी शर्म आ जाती है ;

जंगली जानवरों की हिंसा भी तब दयावान नज़र आती है ,
जब अवसरवादिता ही कई पीढ़ियों की जिंदगी एक साथ लील जाती है ;

वैसे राजनीति बड़े अजीबोगरीब फैसलों से हर बार रूबरू करवाती है ,
शिक्षित को कामगार तो कभी निरक्षर को ज्ञानी पुरूष दिखलाती है ;

हजूर की ज़र्रानवाज़ी में साथी सँगली तो कभी अपनों को ही परेशानी झेलनी पड़ जाती है ,
कभी कभी तो रहबर के इम्तिहान की हद में जान भी सदके में उतर जाती है ;

कहते हैं वैज्ञानिक तकनीक में हम अव्वल दर्जे पर आते हैं ,
चन्द्रमा पर बरसों पहले भेज इन्शा आज जो हम इतराते हैं ;

बायोलॉजिकल रोबोट तैयार करने की जुगत में भी दौड़ हम लगाते हैं ,
हर नये मिशन में इंसान को सुखी बनाने का झंडा हम उठाते हैं ;

फिर सियासत की मजबूरी कहें या मतलबपरस्ती उनकी जो इस कदर गिर जाते हैं ,
जन आधार, राशनकार्ड सब होने के बावजूद सरेआम दंगों को दहशतगर्द नन्गे नाच के साथ कर जाते हैं ;

दंगों में सियासतदानों के फायदे ही फायदे जो नजर आते हैं ,
कभी सत्ता दल तो कभी विपक्षी बन मगरमच्छ के आँसू वो बहाते हैं ;

सियासत सिर्फ सत्ता तक पहुंचने भर की चाभी होती है ,
वरना एक ही धर्म में ऊंच नीच तो कहीं दूसरे की मौजूदगी नाक़ाबिले बर्दाश्त ना होती ;

सच तो ये है कि धर्मान्धता, स्वकेन्द्रित व आत्मसुख की चाह ही मासूम को बेगैरत से हैवान बनाती है ,
वरना क्रुर सियासत सरमायदारों के घर पर हाजिरी तो कभी चाकरी नहीं बजाती होती ;

“” सत्ता नहीं सिर्फ समर्पण की चाह पैदा करो,
स्वकेन्द्रित के प्रति अग्रसर होना ही क्रूरता को निमंत्रण देना है। “”

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

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