Friday, March 31, 2023

“” अबूझ पहेली या अनसुलझे सवाल “”

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“” Unsolved Riddles or Unresolved Questions “”
“” अबूझ पहेली या अनसुलझे सवाल “”

इशारों के ताने बाने से जो बुना गया ,
सजाने के वास्ते गुणों को एक एक कर जड़ा भी गया ;

दर परत दर रहस्य को इस कदर ढका जो गया ,
पूछने के तरीकों से जब दूसरों को छला भी गया ;

कल्पना को हर तरीके से जब मथा गया ,
उलझनों के पेज खोलने की बाजीगरी में ;

और ज्यादा सोच को जब गूंथा गया ,
सूझने वाले द्वारा इसका नाम “अबूझ पहेली” रखा गया ;

सिरा या अंतिम छोर उलझन का जिसने जो पकड़ लिया ,
हर सवाल का जवाब फिर हर किसी ने रच दिया ;

अबूझ ना रही अब कोई भी पहेली जीवन की ,
सूझबूझ से कल्पना में सवाल को जब खोजा गया ;

प्रकृति की प्रवृत्ति व अद्भुत रहस्यों से पर्दे हटाते इन्शा जो चलता गया ,
अनगिनत साहित्य फिर कवियों व साहित्यकारों द्वारा लिखा भी गया ;

कलाकार द्वारा अछूते पहलू को खूबसूरती से जब जब रखा गया ,
न जाने क्यूँ फिर भी “” जिंदगी का हर पहलू अनछुआ “” हर बार लगता गया ;

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

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Amar Pal Singh Brar
Amar Pal Singh Brar
8 months ago

Nice creation

Sarla Jangir
Sarla Jangir
1 month ago

“बात सीधी थी पर एक बार
भाषा के चक्कर में
जरा टेढ़ी फंस गई
उसे पाने की कोशिश में
भाषा को उलटा- पलटा
तोड़ा मरोड़ा
घुमाया फिराया
कि बात या तो बने
या तो भाषा से बाहर आए
लेकिन भाषा के साथ – साथ
बात और भी पेचीदा हो गई ।” – कुंवर नारायण
कई बार ऐसा होता है कि भाव बहुत होते हैं , लेकिन हमारे पास उचित शब्द नहीं होते हैं। तो हमारे भाव और भाषा दोनों अधूरे रह जाते हैं। ऐसा ही हमारे जीवन में कई बार ऐसा ही होता है कि हमारे इरादे कुछ होते हैं और हम कर जाते हैं। इसका मुख्य कारण निश्चयता में कमी है। दृढ़ संकल्प ही सफलता की पहली और अंतिम सीढ़ी है। – प्रोफेसर सरला जांगिड़

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