Manushya Kaun Hai?| मनुष्य कौन है?
मनुष्य कौन है? — एक प्रश्न, जो शायद आपके भीतर भी है
हम मनुष्य को जन्म, नाम, शरीर, शिक्षा, व्यवसाय और सामाजिक पहचान से जानते हैं। लेकिन क्या मनुष्य वास्तव में केवल इतना ही है?
“मनुष्य कौन है?” इसी सरल दिखाई देने वाले प्रश्न से यह पुस्तक एक गहरी दार्शनिक यात्रा आरम्भ करती है। यह पुस्तक किसी एक मत, सिद्धान्त या पूर्वनिर्धारित उत्तर को थोपने के बजाय पाठक को स्वयं अपने अस्तित्व, चेतना, विचार, संबंधों और जीवन के उद्देश्य पर प्रश्न करने के लिए आमंत्रित करती है।
हम कौन हैं?
हम जैसा सोचते हैं, वैसा क्यों सोचते हैं?
हमारी इच्छाएँ, भय, आसक्तियाँ और संघर्ष कहाँ से आते हैं?
क्या मनुष्य केवल परिस्थितियों का परिणाम है या उसके भीतर स्वयं को समझने और बदलने की क्षमता भी है?
यदि मनुष्य स्वयं को जान ले, तो उसके जीवन में क्या बदल सकता है?
‘मनुष्य कौन है?’ केवल पढ़ने की पुस्तक नहीं बल्कि स्वयं से संवाद आरम्भ करने का एक अवसर है।
यदि कभी आपके भीतर भी यह प्रश्न उठा है कि “मैं वास्तव में कौन हूँ?”, तो शायद इस पुस्तक की यात्रा आपके लिए भी एक अर्थपूर्ण यात्रा बन सकती है।
पुस्तक अब प्रकाशित हो चुकी है।
आइए, उत्तर खोजने से पहले एक बार प्रश्न को पूरी गहराई से पूछें—
मनुष्य आखिर कौन है?
Manushy Kaun Hai? | मनुष्य कौन है?
प्रकाशक से सीधे –
‘मनुष्य कौन है?’ — Motilal Banarsidass Bookstore –
https://mlbdbook.com/products/manushaya-kaun-hai
Amazon marketplace पर –
मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ, शिष्य – प्रोफेसर औतार लाल मीणा
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।


When this book will be available in the market, I will definitely read. I am very curious about it