Thursday, July 25, 2024

Mission of Manas Panth | मानस पँथ का लक्ष्य

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मानस पँथ का अर्थ | मानस पँथ का लक्ष्य
Mission of Manas Panth | Manas Panth Ka Lakshya

Mission of Manas Panth | मानस पँथ का लक्ष्य

★ मानस पँथ का शपथ पत्र
★ मानस पँथ के तीन केंद्रीय बिंदु
● प्रथम केंद्रीय बिंदु – शिक्षा
● द्वितीय केंद्रीय बिंदु – समानता
● तृतीय केंद्रीय बिंदु – स्वावलंबन

★ मानस पँथ का शपथ पत्र

मानस का “” शपथपत्र “”

【1】. मैं 【 शपथकर्त्ता 】मानस पंथ को समर्पित होते हुए सर्वप्रथम मानवीय मूल्यों की समानता में अपनी आस्था प्रकट करता हूँ।

【2】. हम सर्वप्रथम एक इंसान हैं उसके उपरांत एक परिवार, समाज या राष्ट्र का हिस्सा हैं।

【3】. हम इंसानियत या मानवीय मूल्यों का अनुसरण करते हुए “” शिक्षा, समानता

व स्वावलंबन “” के प्रति सजगता, जागरूकता के साथ निज आचरण में चरितार्थ करना ही हमारा परम् धर्म है।

【4】. हम ना ही किसी धार्मिक मार्ग या पंथ का समर्थन करते हैं और ना ही हम विरोध करते हैं अपितु धरातलीय ज्ञान “” प्रकृति की मुस्कान ही ईश्वरीय भान “” को स्वीकार्यता प्रदान करते हैं।

【5】. हम बिना किसी छिद्रान्वेषण के प्राणित्व यानि 【महिलाओं व वंचित, शोषित , पिछड़े वर्ग 】के लिए समानता व सम्मानजनक स्थितियों के निर्माण व प्रोत्साहित करना ही हमारा परम् ध्येय है।

【6】. हमारा आध्यात्मिक आदर्श का आधार क्षमा, प्रेम, निष्पक्षता, दया व ईमानदारी के नियमों का निज व्यवहार में सँजोकर समरसता, अहिष्णुता व सहयोग की भावना को पुनः जीवंत करना है ।

【7】. हम गुरू परम्परा में माता पिता के बाद स्वयं को ही गुरु मान्य करते हैं।

【8】. हमारा मन, वचन व कर्म से किसी के हृदयाघात नहीं पहुंचाना व इसके लिए सदैव प्रयासरत रहना है।

【9】. हम सदैव सामाजिक कुरीतियों व धार्मिक पाखण्ड में मोक्ष आदि का समर्थन नहीं करते हैं बल्कि वैज्ञानिकता के आधार पर खण्डन करते हैं।

【10】. हम भगवान को ढूंढने या प्राप्ति में ( तन्त्र, मंत्र, यन्त्र ) साधना का प्रयोग के बजाय प्रकृति की प्रवृत्ति यानि नियमों में विश्वास रखते हैं।

★ मानस पँथ के तीन केंद्रीय बिंदु

मानस के तीन कोर बिंदु यानि
विचारधारा के तीन केंद्रीय बिंदु –
Education – शिक्षा
Equality – समानता
Independency – स्वावलंबन

जैसे कि ऐतिहासिक घटना रही फ्रांस की क्रांति से निकली Liberty, Equally and Fraternity की विचारधारा को सामाजिक में बहुत ही आंशिक बल मिला। क्योंकि वास्तविक धरातल में अंतर्विरोध की भेंट चढ़ गया।

कुछ वैसे ही सामाजिक पुनर्सर्णचना के लिए तीन बिंदुओं को केंद्रित करती विचारधारा को अपनाने पर विचार विमर्श के लिए स्थान देना ही चाहिए।

एक बार इस संदर्भ को निरपेक्ष होकर विचार या तर्कयुक्त मंथन किया जा सकता है। मुझसे सहमत होना या ना होना आपके विवेक पर निर्भर करेगा।

मैं फिर भी इस नजरिए पर आपका ध्यान आकर्षित कुछ बिंदुओं के तहत ही करवाना चाहूंगा।

  1. Education 【शिक्षा 】-

A.. व्यवहारिक सन्दर्भों में अक्षर ज्ञान ही सत्य या व्यवहार का स्पस्ट व निष्पक्ष आंकलन में सहायक सिद्ध होता है।

B. शिक्षा किसी भी समाज या राष्ट्र में अपनाई गई वैधानिक शैली की सफलतम व सर्वश्रेष्ठ कुंजी है।

C. देश या सामाजिक ढांचे को न्यायिक व आर्थिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण इकाई है।

D. सभ्य यानि अनुशासित व आधुनिक सामाजिक ढांचे के लिए शिक्षा ही सर्वोच्च स्थान या प्राथमिकता में दर्ज होता है।

  1. Equality 【समानता 】-

A. समाज के हर वर्गों में समान भाव एक स्वस्थ, सुदृढ व सुंदर समाज के लिए अहम भूमिका निभाता है।

B. परिवारिक या सामाजिक व्यवस्था में लिंग भेद को नकार सबके लिए समान अवसर आपसी सहयोग, विश्वास व समर्पण पैदा करते हैं।

C. धार्मिक तौर पर समानता पारस्परिक प्रेम,भातृत्व व बंधुत्व की विचारधारा को मजबूती प्रदान करता है।

D. समानता हरेक क्षेत्र में फैले अविश्वास, वैमनस्य व अलगाववादी विचारधारा का समूल नाश करने का सरल व कारगर हथियार साबित होता है।

  1. Independency 【स्वावलंबन 】 –

A. किसी भी पारिवारिक, सामाजिक या राज्य इकाई द्वारा अपने वजूद को सरंक्षित करने के लिए आत्मनिर्भर होना गर्व की बात होती है।

B. स्वावलंबन आर्थिक आजादी के साथ वैचारिक स्वतंत्रता भी प्रदान करता है।

C. स्वावलंबन में लिंग भेद की दीवार गिरा दी जाये तो महिला व पुरूष दोनों पारिवारिक विपत्ति में एक दूसरे की ढाल तो बनते ही हैं। साथ ही साथ समाज को आर्थिक रूप विकसित भी करते हैं।

D. निजता, भावनात्मक या स्वाभिमान को बनाये रखने के लिए स्वावलंबन बेहद जरूरी है हरेक इकाई के लिए। एक दूजे का सम्मान रखना यह अच्छी परम्परा है वरना मजबूरी में तो सिर्फ दासता , ज़िल्लत या गिलानी युक्त समझौते ही मिले हैं।
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इसी तरह जब देश स्वास्थ्य, सूचना प्रद्योगिकी , रक्षा, रिसर्च एंड डेवलपमेंट व कृषि उत्पाद में आत्मनिर्भर होता है तो अन्य देश से रिश्तों उनकी शर्तों पर न होकर अपनी सहूलियत व आवस्यकता पर निर्भर करते हैं।

यानि एक स्वस्थ, सुंदर व सुदृढ़ परिवार या समाज के लिए शिक्षा, समानता और स्वावलंबन बेहद जरूरी भी है और सामाजिक न्याय यानि गरिमामयी जीवन के लिए नितांत आवश्यक भी।

साफ शब्दों में –
“” जाति, धर्म व लिंगात्मक भेद को मिटाकर समानता के साथ शिक्षा व स्वावलंबन परिवार के साथ देश व समाज के लिये उपयोगी ही नहीं बेहद खूबसूरत , शोभनीय शैली के परिचायक हैं।””

“” शोषित, वंचित की यही गुहार,
हर वर्ग की बने पुकार ;
शिक्षा, समानता व स्वावलंबन पर हो सबका अधिकार ।””

● प्रथम केंद्रीय बिंदु - शिक्षा

मानस पंथ द्वारा प्रयासरत
मूलभूत अधिकारों की अहम प्रथम इकाई बने “” शिक्षा “”

“” शिक्षा “””

“” शालीनतापूर्वक अपने पक्ष को जानने व रखने का वैधानिक ज्ञान ही शिक्षा है। “”

“” व्यवहारिक अंतर्भाव व अस्पस्टता को परखने हेतु एक तर्कशक्ति युक्त सामाजिक स्वीकार्य पद्धति ही शिक्षा है। “”

सरल शब्दों में –
“” अक्षर ज्ञान की सवैधानिक मान्यतापूर्ण क्रमबद्ध ,युक्ति युक्त व संस्थागत पद्धति ही शिक्षा है। “”

वैसे “” श “” से शब्द ज्ञान जहां बुद्धिमत्ता पर सवार होता है,
वहाँ सामाजिक उन्नति के द्वार हरेक क्षेत्र में खुल जाते हैं;
“”क्ष “” से क्षमता जहां निजी व्यक्तित्व की मौताज़ न होकर सार्वजनिक हो जाती है,
वहाँ सामाजिक व विश्व कल्याण के मार्ग प्रशस्त होते हैं ;

वैसे शब्द ज्ञान जहां क्षमता का विस्तार करता है,
सामाजिक उन्नमोमुखी व उत्थान के मार्ग को प्रशस्त करता है।

“” शिक्षा सुंदर, सभ्य व सुदृढ़ समाज की आधुनिक शैली का परिचायक है। “”

“” हर प्राणी के लिये हो लक्ष्य हमारा —
शिक्षा से हो उसके जीवन में उजियारा “”

● द्वितीय केंद्रीय बिंदु - समानता

मानस पंथ द्वारा प्रयासरत
मूलभूत अधिकारों की अहम द्वितीय इकाई बने “” समानता “”

“”सभी पक्षों के लिए निरपेक्ष व्यवहार करने की क्षमता का भाव ही समानता है। “”

“” निर्विवाद व निर्विरोध अपने पक्ष को रखने की स्वायत्तता या अभिव्यक्ति की स्थिति ही समानता है। “”

वैसे “” स “” से सर्वहित जहां परम्परा में विद्यमान हो,
वहाँ भाईचारे व बंधुत्व की विचारधारा आसमान छूने लगती है;
“” म “” से मर्म जहां संवेदनाओं में रच बस जाये,
वहाँ सहयोग, करुणा , दया व प्रेम की अनुभूति स्वतः होनी लगती है;

“” न “” से न्याय जहां कार्यशैली को केंद्रित करने लगे,
वहाँ स्वायत्तता भी सर्वकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करती है;
“” त “” से तार्किक जहां कार्यव्यवहार में नियमित व नियमब्द्ध आचरण में शामिल हो,
वहाँ पक्षपात भी न्यायिक व समाज के लिए उपयोगी लगने लगता है।

वैसे सर्वहित मर्म जहां न्याय पर आसीन हो समाज की उन्नति की बात करे,
वहाँ तार्किक विश्लेषण सामाजिक न्याय व सर्वांगीण विकास की अवधारणा विकसित करता है।

“” समानता परिवार ही नहीं अपितु एक आदर्श समाज में भातृत्व, बन्धुत्व व आपसी सहयोग की भावना विकसित करता है। “”

“” हर प्राणी के लिये हो ध्येय हमारा–
समानता की सुख, समृद्धि से जगमगायेगा घर द्वार हमारा “”

● तृतीय केंद्रीय बिंदु -  स्वावलंबन

मानस पंथ द्वारा प्रयासरत
मूलभूत अधिकारों की अहम तृतीय इकाई बने “” स्वावलंबन “”

“” निजी अस्तित्व को बनाये रखने में बुद्धि कौशल द्वारा अर्जित वांछनीय आय ही स्वावलंबन को परिलक्षित करता है। “”

“” लालन पालन हेतू पर्याप्त मात्रा में धनोपार्जन की दक्षता प्रकट करती स्थिति ही स्वावलंबन है। “”

“” अपने निर्णय को निर्बाध या अनवांछित हस्तक्षेप भय के विरुद्ध अविरल / निरन्तर कार्यसंचालन में मजबूत व उपयोगी आर्थिक स्थिति ही स्वावलंबन है। “”

वैसे “” स् “” से स्पष्ट जहां आचरण की प्राथमिकता में समा जाये,
वहाँ निष्पक्ष व्यवहार होना स्वभाविक शैली में शामिल होता है;
“” व “” से वांछनीय जहां कार्यव्यवहार में प्रमुखता बनाने लगे,
वहाँ सर्वहितकारी नीतियों का बनना लाज़मी हो जाता है;

“” व “” से वचनबद्धता जहां व्यक्तित्व में प्रमुखता से आचरण में रम जाये,
वहाँ सत्यनिष्ठा कार्यप्रणाली में सिर चढ़कर बोलती है;
“” ल “” से लक्ष्य जहां जीवन शैली की सर्वोच्च पायदान पर आ जाये,
वहाँ कोई भी सीमा कार्य की पूर्णता में बाधा नहीं बन सकती ;

“” म् “” से मर्यादित जहां पुरुषार्थ के प्रमुख गुणों में शामिल हो,
वहाँ संस्कारिक समाज की अवधारणा कल्पनामात्र नहीं रहती;
“” ब “” से बंधनमुक्त जहां जीवन जीने की कला बन जाये,
वहाँ दूसरे की स्वायत्तता निज अधिकारों पर चोट नहीं अपितु एक दूजे के लिए समर्पण की भावना पैदा करता है ;

“” न “” से नेतृत्व जहां किसी वर्ग विशेष का मोहताज न रहे,
वहाँ स्वस्थ, लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना होना स्वभाविक हो जाता है ;
वैसे स्पष्ट वांछनीय वचनबद्धता जहां लालन पालन को मर्यादित बनाती है,
वहाँ बन्धनमुक्त नेतृत्व ही स्वावलंबन का प्रतीक है।

“” स्वावलंबन समृद्ध , सशक्त परिवार की ही नहीं अपितु खुशहाल राष्ट्र की सफलतम व निर्णायक कुंजी है। “”

“” हर प्राणी के लिये हो संकल्प हमारा —
स्वावलंबन बने हर परिवार की खुशी का सहारा “””

These valuable are views on Mission of Manas Panth | Manas Panth Ka Lakshya.
मानस पँथ का अर्थ | मानस पँथ का लक्ष्य

मानस जिले सिंह
【 यथार्थवादी विचारक】
अनुयायी – मानस पँथ
उद्देश्य – समाज में शिक्षा, समानता व स्वावलंबन के प्रचार प्रसार में अपनी भूमिका निर्वहन करना।

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Manas Shailja
Member
2 years ago

GREAT VALUES

Manas Shailja
Member
2 years ago

SO GREAT INITIATIVE

Sarla Jangir
Sarla jangir
2 years ago

Great , good job

ONKAR MAL Pareek
Member
2 years ago

मुझे खुसी है कि मुझे इतने महान लक्ष्य रखने वाले परिवार का सदस्य बनने का मौका मिला मैं ओंकार पारीक आप सबको प्रणाम करता हूँ / आप सबका स्वागत करता हूँ /

Mahesh Soni
Mahesh Soni
1 year ago

कर बुलंद खुद को इतना, कि किसी का मोहताज ना बनना पड़े!
कर दे नामुमकिन को भी मुमकिन इस कदर, की किसी को पता भी ना चले!

महेश सोनी

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