Monday, February 16, 2026

Meaning of Sakshi Yoga | साक्षी योग की अवधारणा

More articles

साक्षी योग का अर्थ | साक्षी योग की अवधारणा
Meaning of Sakshi Yoga| Sakshi Yoga Ka Arth | Sakshi Yoga Ki Avdharna

|| Meaning of Sakshi Yoga ||

साक्षी योग

प्रथम तल  :- आत्म-अवलोकन

  1. आत्मस्वरूप को जानने की प्रक्रिया (मैं कौन हूँ) –

यानि मैं यहाँ शारीरिक/ स्थूल से नहीं अपितु विचार शक्ति के पुंज यानि आत्म तत्व की तरफ ध्यान केंद्रित करना है|

अस्तित्व नहीं स्वयं के गुणों और अवगुणों को जानने का प्रयास भर है|

  • आत्मविश्लेषण की विशेष प्रक्रिया –

मौजूदा गुणों के साथ जीवन पथ पर आगे निसंकोच बढ़ा जा सकता है? यानि गुणों की पर्याप्तता सहजता प्रदान कर रही है?

  • लक्ष्योन्मुखी ध्येय प्रक्रिया –

लक्ष्योन्मुखी बने रहने के लिए हमें किन किन क्षेत्र पर ध्यान देने की आवश्यकता है और इसे बड़ी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिये|

  • आंकलन प्रक्रिया –

किन गुणों के विकास पर बल देना चाहिये और किसे (गुण) अपने जीवन में सम्मिलित करने की आवश्यकता है और किन आदतों को तुरंत प्रभाव से त्याग देने की जरूरत है|

  • प्रकृति तत्व से आत्मसात प्रक्रिया –

उपरोक्त प्रक्रिया करने के उपरांत यह आभास करना की जो मैंने जाना है वो बेहतर नहीं अद्भुत भी है अकल्पनीय और अद्वितीय भी| इस आनंदयुक्त, ओजस्वी और अंतर्मुखी विचार को बार बार अभ्यास करते हुये उसे अपने जीवन में आत्मसात करना|

द्वितीय तल :- [अहिंसा, करुणा, पवित्रता, निष्पक्षता, न्याय] मानवीय मूल्य में आस्था    

साधारण शब्दों में जो व्यवहार आप अपने लिए विचार और व्यावहारिकता में लाना चाहते हैं उसे दूसरों के लिए पहले उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध या लाने हेतु वचनबद्धता दिखनी चाहिये|

तृतीय तल :- प्रकृति में ही समर्पण की स्वीकार्यता   

साधारण शब्दों में ईश्वरीय या प्रकृति द्वारा उत्पन्न सभी जीव, प्राणियों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिये| 

चतुर्थ तल :- शांति की साधना से शून्य की ओर प्रस्थान  

साधारण शब्दों में शांत चित् रखते हुये सम भाव की तरफ अग्रसर होना चाहिये |   

पंचम तल :- [विश्वास, प्रेम, क्षमा, सत्य और मौन] ब्रह्म मार्ग से मोक्ष

साधारण शब्दों में प्रकृति के नियम में विश्वास, निस्वार्थ प्राणियों से प्रेम, किसी भी प्रकार के बने आलोचक या विरोधी या असहजता के भाव को पैदा करने वाले को क्षमा का दान, ब्रह्म ही एक मात्र सत्य है उसकी स्व स्वीकृति और उसके उपरांत हर वस्तु विचार से निर्लिप्तता ईश्वर से मिलने की चाह से भी निवृत्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है| इस कड़ी दर कड़ी बने संकल्पित लक्ष्य को सुव्यवस्थित, सुचारु और संयमित निभाने की प्रक्रिया को ही साक्षी योग कहते हैं|

“आत्म-अवलोकन से लेकर मानवीय जीवन को बेहतर बनाने हेतु संकल्पबद्धता, प्रकृति तत्व में समर्पण, शांत चित्त से समभाव, अनन्य व अटूट विश्वास, निरंतर निस्वार्थ व निश्चल प्रेम, निसंकोच क्षमा, सत्य में ही आस्था और ऊपर से हर चाह निवृत्ति होकर मौन हो जाने सम्पूर्ण विधि का नाम ही साक्षी योग है|”

These valuable are views on Meaning of Sakshi Yoga| Sakshi Yoga Ka Arth | Sakshi Yoga Ki Avdharna
साक्षी योग का अर्थ | साक्षी योग की अवधारणा

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ , शिष्य – प्रोफेसर औतार लाल मीणा
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest