Sunday, January 11, 2026

Meaning of Thinking | सोच की परिभाषा

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सोच की परिभाषा | सोच का अर्थ
Meaning of Thinking | Meaning of Consideration | Soch ki Paribhasha

“” सोच “”

“” कार्यशैली के अंतर्निहित गुणों का प्रतिबिंब ही सोच कहलाती है। “”

“” व्यहवार में निर्णायक कदम आपकी सोच है। “”

वैसे “” स “” से सारगर्भित जहां तथ्यों की गम्भीरता को दर्शाती है ,
वहाँ व्यक्तित्व में ठहराव के साथ परिपक्वता भी झलकने लगती है :
“” च “” से चर्चा जहां विषय के पकड़ की हो तो ,
वहाँ परिणाम अविस्मरणीय , अकल्पनीय व अनुकरणीय ही निकलते हैं;

“” वैसे सारगर्भित जहां कथन की महत्वत्ता को बढ़ा देते है,
वहाँ चर्चा का विषय आपकी सोच कहलाती है । “”

मानस की विचारधारा में –

“‘ वह क्रियान्वयन जो आपके जीवन के पहलू से अवगत करवाये वह सोच कहलाती है। “”

“” क्रियाशील विचारधारा जो आपके व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाती है वह सोच कहलाती है। “‘

“” जीवन के क्रियाकलापों को निर्धारित करने की मानसिक अवधारणा ही सोच है। “”

“” सोच सकरात्मक के साथ परमार्थ से जुड़ जाये तो सर्वकल्याण और नकारात्मक हो तो अलगाव व विध्वंस तय है।

“मानस” सकारात्मक सोच के प्रतिनिधित्व को बल देती है और यही समय की जरूरत भी है व इसमें समाज का हित भी। “””

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सोच की परिभाषा | सोच का अर्थ

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना

3 COMMENTS

  1. ये सोच ही तो है साहब जिसमे निराशावादी व्यक्ति को अवसर में भी कठिनाई नजर आता हैं और आशावादी व्यक्ति को कठिनाई में अवसर नजर आता हैं.

    एक पेड़ से लाखों माचिस की तीलियाँ बनती हैं, लेकिन एक तीली लाखों पेड़ जला देती हैं. इसी प्रकार एक नकारात्मक विचार या सोच आपके हजारों सपनों को जला सकता हैं.

    वह व्यक्ति जो सकारात्मक सोच रखता हैं, वह अदृश्य को देख लेता हैं, अमूर्त को महसूस करता हैं और असम्भव को पा लेता हैं.

    व्यक्ति नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदलकर अपना भविष्य बदल सकता हैं

    आपका देखने का नजरियाँ जैसा होगा, आपको चीजें भी वैसी ही दिखाई देंगी.

    नकारात्मक सोच सिर्फ नकारात्मक परिणाम देती हैं और सकारात्मक सोच सिर्फ सकारात्मक परिणाम देती हैं.

    सोच पर ही जीवन कि दशा ओर दिशा टिकी है इसलिए सोच ओर संगत हमेशा सकारात्मक ही रखनी चाहिए जिससे अपना ही नहीं बल्कि जनमानस का भी कल्याण हो /

  2. –लोग क्या सोचेंगे ?

    अगर आप भी यही सोचेंगे,

    तो फिर लोग क्या सोचेंगे ।।।

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