Thursday, July 25, 2024

मानस किसे कहते हैं | Definition of Ramcharitmanas

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मानस किसे कहते हैं | रामचरितमानस क्या है
Definition of Ramcharitmanas | Meaning of Manas | Ramcharitmanas Ki Paribhasha

“” मानस “”

“” मानस का पौराणिक मान्यता में अर्थ “”
उदाहरण में —
“” रामचरितमानस “” की व्याख्या ज्यादातर सन्धि विच्छेद द्वारा इस तरह से की जाती है।

राम + चरित + मानस
जहां
राम = मर्यादा पुरुषोत्तम
चरित = आदर्श मानवीय मूल्यों को समर्पित जीवन चरित्र / आचरण व व्यवहार
मानस = हृदय / मनुष्य/ मानुष

~ इसमें राम को व्यक्ति यानि कर्ता माना जाये तो-

“” राम का आदर्श मानवीय मूल्यों को समर्पित जीवन चरित्र। “”

~ उसके बाद मानस के अर्थ को जोड़ा नहीं जा सकता।

~ यदि राम को गुण माना जाये तो सन्धि विच्छेद द्वारा अर्थ, सही वाक्य प्रस्तुत नहीं करता।

★ परन्तु हमारे द्वारा व्यक्त की गई व्याख्या सही प्रतीत होती है। ★

सन्धि विच्छेद द्वारा
मा + न + स = मानस

मा = मातृत्व भाव के साथ “” सृजन “”
न = न्याय के साथ निर्बाध , निर्विरोध व निरन्तर “” भरण पोषण “” 【 दायित्वों का निर्वहन 】
स = संचालन में सर्वव्यापकता के साथ सर्वकल्याण व “” संहार “”

“” मातृत्व के साथ सृजन , न्याय के साथ 【 निर्बाध , निर्विरोध व निरन्तर 】 भरण पोषण 【 दायित्वों का निर्वहन 】 व संचालन में सर्वव्यापकता के साथ सर्वकल्याण व संहार का अंतर्निहित गुण का धारणकर्ता ही “” मानस “” कहलाता है। “””

दूसरे अर्थों में –
मा + न + स = मानस

मा = मृत्युंजय होने पर भी मार्मिक हो
न = नित्य, निर्विकार व निर्विवाद होने पर भी न्यायशील हो
स = स्वर्णिम प्रकाशयुक्त होने पर भी सहनशील हो

“” जिसमें मार्मिकता, न्यायशीलता व सहनशीलता के गुण विद्यमान हो वह मानस कहलाता है। “”

तीसरे अर्थों में –
मा + न + स = मानस

म = महाशक्ति
अ = अद्वितीय अधिपति
न = नकारात्मक
स = सकारात्मक

“” जो नकारात्मक व सकारात्मक महाशक्ति का अद्वितीय अधिपति हो तो वही मानस कहलाता है। “”

~ यानि राम एक कर्ता के रूप में –
“” राम का जीवन चरित्र मानस [ उपरोक्त दी गई मानस की परिभाषा ] को सर्मपित । “”

~ यानि स्पष्ट अर्थों में –
“” राम मानस के अनुयायी, उपासक या भक्त ही थे। “”

~ आदि शंकराचार्य ने भी शिव मानस पूजा की चर्चा की है। –
“” मानस का शिव भी ध्यान लगाते हैं। “”

~ वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा ने अपने मन से १० पुत्रों को जन्म दिया जिन्हें मानसपुत्र कहा जाता है। भागवत पुरान के अनुसार ये मानसपुत्र ये हैं- अत्रि, अंगरिस, पुलस्त्य, मरीचि, पुलह, क्रतु, भृगु, वसिष्ठ, दक्ष, और नारद हैं।
यहाँ भी मन में अधिष्ठाता मानस ही तो है। ~

यानि  “” ब्रह्मा , राम 【 विष्णु 】 व शिव 【 महेश 】 सब जिस निराकार, निर्गुण, नित्य, स्वंयम्भू, सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान का ध्यान करते हैं वह “” मानस “” ही है। “”

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मानस किसे कहते हैं | रामचरितमानस क्या है

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

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Devender
Devender
2 years ago

nice 👍 post

Amar Pal Singh Brar
Amar Pal Singh Brar
2 years ago

बेहद सुन्दर व्याख्या

Sanjay Nimiwal
Sanjay
2 years ago

मन, आत्मा,आध्यात्मिक विचार, दिल, बुद्धि, इच्छा, उत्साह के साथ कार्य करने वाला व्यक्तित्व

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