Thursday, July 25, 2024

Needs of Purity | विचारों में बढ़ती अशुद्धि

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विचारों में बढ़ती अशुद्धि | अपवित्रता की बानगी
Needs of Purity | Welcome of Thoughts | Vicharon Me Badti Ashuddhi

“” Welcome Purity of Thoughts “”
“” विचारों में नव संचार को भी कहें राम – राम “”

दीपावली पर्व की झिलमिलाती व जगमगाती रोशनी की ओढ़नी के साथ – साथ मिठाइयाँ व शुभ सन्देश मन को हर्षोल्लास से भर देतें हैं।

इसी बीच प्रदूषण सेहत ही नहीं पूरे पर्यावरण के चिंता का विषय बना हुआ है।

इस मुद्दे पर जोर प्रिंट मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है।

इसी बीच हम आपका ध्यान
“” विचारों में बढ़ती अशुद्धि, अपवित्रता व अकर्मण्यता “”
पर डालना चाहते हैं।

क्योंकि वायु प्रदूषण सिर्फ सेहत या फिर जीवन की हानि करता है,
परन्तु विचारों का प्रदूषण मानवीय मूल्यों को क्षत विक्षत करने के साथ – साथ

पूरी नस्लों को आलसी, कट्टर व हिंसक ही नहीं क्रूर, दरिंदा व नक्सली भी बनाता है।

निम्न बिंदुओं के तहत विश्लेषण –

1. न्यायालय द्वारा स्वः केंद्रित, अतार्किक व अलगाववाद विचारधारा से प्रेरित रहना।

जिससे निर्णय प्रक्रिया का विसंगतिपूर्ण, भेदभावपूर्ण व मनमौजीपन होने की तस्वीर का प्रदर्शित होना।

2. शिक्षा व्यवस्था का अपूर्ण, अव्यावहारिक व विषय संगत के न होने की ओर अग्रसर होना।

जिससे विद्यार्थियों के जीवन को बंधुआ मजदूरी की तरफ़ धकेला व मजबूर किया जा रहा है।

3. सेवा क्षेत्र का अपवित्र, अमर्यादित व अलोकतांत्रिक विचारों की और अग्रसर होना।

जिससे अविश्वास, धोखाधड़ी व छल की प्रक्रिया दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

4. व्यापार में गलाकाट प्रतियोगिता का रुचिकर लगना स्वाभाविक प्रक्रिया बनना।

जिससे व्यापार वस्तु की गुणवत्ता व ग्राहक की सुविधा नहीं अपितु चुना , ठगी व प्रलोभन का चलन सरे बाजार का हाल बनता जा रहा है।

5. धार्मिक प्रथाओं का दिनों दिन कट्टरपंथी सोच इख्तियार करना।

जिससे सामाजिक समरता व बन्धुत्व की भावना क्षीण प्रतीक होती जा रही है।

इन उपरोक्त पांचों कारकों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला कारण —

“” राजनैतिक दलों में छद्मनीति, कूटनीति, जातिवाद व ऊँचनीच का ज़हर से येनकेन सर्वेसर्वा होने की महत्वाकांक्षा बढ़ना। “”

जिससे राजनैतिक पार्टियों की कार्यशैली में झूठ, भ्रामक, अर्द्धसत्य , तुष्टिकरण व लालची अकर्मण्यता को बढ़ाने वाले प्रचार प्रसार की भरमार होने लगी है।

“” राजनीति व विचारों की शुद्धता से ही सामाजिक व मानवीय मूल्यों का उत्थान सम्भव है। “”

These valuable are views on Needs of Purity | Welcome of Thoughts
विचारों में बढ़ती अशुद्धि | अपवित्रता की बानगी

मानस जिले सिंह
【 यथार्थवादी विचारक】
अनुयायी – मानस पँथ
उद्देश्य – सामाजिक व्यवहारिकता को सरल , स्पष्ट व पारदर्शिता के साथ रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करना।

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Sanjay Nimiwal
Sanjay
1 year ago

बहुत खूब 👌👌👌

विचारों की शुद्धता ही,

संस्कारों की पहचान कराती है।

Amar Pal Singh Brar
Amar Pal Singh Brar
1 year ago

बहुत बढ़िया

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