Monday, June 24, 2024

Definition of Favor | अहसान की परिभाषा

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अहसान की परिभाषा | अहसान क्या है
Definition of Favor | Meaning of Approval | Ahsan Ki Paribhasha

“” अहसान “”

“” किसी प्राणी की कमजोरी या अभाव को जानते हुए उसके अहम को बनाये रखने के लिए सहनशील प्रयास को अहसान ही कहते हैं। “”

“” किसी की दुर्बलता को सरंक्षित करने हेतु निःस्वार्थ मदद को भी अहसान ही कहते हैं। “”

“” चुपचाप बिना कहे किसी की मजबूरी को दूर करना भी तो अहसान ही है। “”

सामान्य परिप्रेक्ष्य में –

वैसे “” अ “” से असमर्थता
“” ह “” से हरण करना
“” स “” से समर्थता
“” न “” से नींव डालना

“” किसी की असमर्थता का हरण कर जब सामर्थ्यता की नींव डाली जाये तो वह अहसान कहलाता है। “”

वैसे “” अ “” से असक्षम
“” ह “” से हाल-ऐ-बयाँ
“” स “” से संकटमोचन बनना
“” न “” से निभाना

“” असक्षम के हाल-ऐ-बयाँ पर जब संकटमोचन बन कोई निभाये तो वह अहसान ही कहलाता है।””

सामान्य परिप्रेक्ष्य में –

“” आशान्वित रहने पर जब कोई सहयोग करे तो वह भी अहसान ही है। “”

“” अपनी जवाबदारी होने के उपरांत भी आपको जब कोई अहसास ना करवाये तो वह भी अहसान ही कहलाता है। “‘

—- “” अहसान और कर्ज एक ही सिक्के के दो पहलू हैं,
रिश्तों या भावनाओं में दोनों साथ-साथ रहते हैं ,
परन्तु व्यावसायिक सम्बन्धों में अहसान से ज्यादा कर्ज़ लेना बेहतर विकल्प रहता है। “” —-

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अहसान की परिभाषा | अहसान क्या है

मानस जिले सिंह
【 यथार्थवादी विचारक】
अनुयायी – मानस पँथ
उद्देश्य – सामाजिक व्यवहारिकता को सरल , स्पष्ट व पारदर्शिता के साथ रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करना।

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Sanjay Nimiwal
Sanjay
1 year ago

निशब्द 🙏🙏🙏

अहसान दोनों का ही था,

मकान पर …..।।

छत ने जता दिया,

और नींव ने छुपा लिया ।।।

Amar Pal Singh Brar
Amar Pal Singh Brar
1 year ago

अति सुन्दर व्याख्या

Mahesh Soni
Mahesh Soni
1 year ago

“कभी पड़ोसी का घर जलते देख मुस्कुराना नही!
क्योकि उसके बाद आपका ही नंबर आ सकता है।
इसलिए चाहे वो आपका गौर दुश्मन ही क्यों ना हो, 
सहयोग की भावना से, मदद कीजियेगा।
यदि दुश्मन भी होगा तो दोस्त बनने में देरी नही होगी।”

कर भला तो हो भला!

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः ।
सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु ।
मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥

महेश सोनी

Mahesh Soni
Mahesh Soni
1 year ago

किसीके अहसान तले मरने से बहत्तर हैं, कि स्वंय को इतना सशक्त बना लो; कि कभी किसीके अहसान की आवश्यकता ही ना पड़े।

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