Monday, November 28, 2022

“” भगवान की परिभाषा “” OR “” भगवान क्या है “”

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“” भगवान की परिभाषा “” OR “” भगवान क्या है “”

“” Bhagwan ki Paribhasha “ OR “” Bhagwan Kya hai “”

“” भगवान “”

“” अविरल, अविनाशी, अकल्पनीय अलौकिक ऊर्जा सकारात्मक एवं नकारात्मक भाव का अनवरत रूप से किसी सूक्ष्म अणु या तत्व में समाहित होकर नवनिर्माण【 【 सृजन 】 , क्रियात्मक पुरुस्कार 【 फल 】 व विध्वंस  【 नष्ट 】 करना शामिल हो, वह भगवान है। “”

मेरी नज़र में –
“” जो मानवीय मूल्यों 【 नैतिक मूल्य व आध्यात्मिक मूल्य 】 के साथ जीवन जीने को प्रेरित करे वही भगवान कहलाता है। “”

वैसे “” भ “” से भाग्य
“” ग “” से गुण दोष
“” व “” से वर्तमान
“” न “” से निष्कंटक
“” जो भाग्य में गुण दोष को देख वर्तमान को निष्कंटक बना दे, वही तो भगवान है। “”

दूसरे शब्दों में –

वैसे “” भ “” से भक्ति
“” ग “” से गतिरोध
“” व “” से वैराग्य
“” न “” से निवृत्ति / निर्वाण
“” भक्ति से गतिरोध वैराग्य और फिर निवृत्ति का जो दूर करे, वही भगवान कहलाता है। “”

अन्य शब्दों में –

वैसे “” भ “” से भाग्यविधाता
“” ग “” से गुणातीत
“” व “” से वात्सलय प्रदाता
“” न “” से नवसृजन का अधिष्ठाता
“” भाग्यविधाता, गुणातीत होने पर भी वात्सलय प्रदाता के साथ – साथ नवसृजन का अधिष्ठाता हो तो वही भगवान कहलाता है। “”

सरल शब्दों में –

वैसे “” भ “” से भय से मुक्ति
“” ग “” से गुमान से परहेज़
“” व “” से विद्वेष से छुटकारा
“” न “” से निर्लज्जता से दूरी

“” जो भय से मुक्ति, गुमान से परहेज़, विद्वेष से छुटकारा व निर्लज्जता से दूरी बनवाये रखे, वही आस्था का प्रतीक भगवान कहलाता है। “”

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

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