ईश्वर से याचना | ईश्वर से प्रेम संवाद
Prayer to God | Prem sanvad | Ek Prartha Ishwar se
|| Prayer to God ||
ईश्वर से याचना
हे दयानिधि,
मुझे कभी दया का पात्र न बनाना।
तुम्हारी दया मुझे दंड से तो बचा सकती है,
पर कहीं ऐसा न हो कि
मैं निकम्मा हो जाऊँ
और कर्तव्य-पथ से भागना सीख जाऊँ।
हे करुणानिधि,
मुझे अपनी करुणा का ऐसा पात्र भी न बनाना
कि दुःख मुझसे दूर हो जाए
और जीवन के महासंग्राम में
मैं संघर्ष करने की सामर्थ्य ही खो दूँ।
तुम्हारी करुणा मुझे सहज अवश्य करे,
पर मुझे पंगु न बनाए।
हे कृपानिधि,
मुझे अपनी कृपा का ऐसा पात्र न बनाना
कि मैं अपने पुरुषार्थ को भूल जाऊँ,
तुम पर निर्भर होकर
कर्तव्य-पथ से विमुख हो जाऊँ
और मिली हुई सामर्थ्य पर
उद्दण्ड या अहंकारी बन बैठूँ।
हे सच्चिदानंद,
विघ्नहर्ता बनकर
मेरे संघर्षों को मिटाना नहीं,
उन्हें साधने की सामर्थ्य देना।
श्री अखिलेश्वर,
मेरे और दुःख के बीच
मजबूरी का नहीं,
प्रेम का संबंध बना देना-
ताकि दुःख भी मुझे तोड़े नहीं,
तराशे।
और ऐसे गुरुजनों के बीच भेजना
जो मुझे सहलाएँ नहीं,
बल्कि तराशें,
निखारें,
संवारें
और मेरे भीतर छिपे सत्य को
मेरे ही सामने प्रकट कर दें।
मुझे लज्जित होकर
याचक बनने का संबंध नहीं चाहिए;
मुझे तो प्रेम में
तुम्हारे सादृश्य बनने की
गहरी चाहत है।
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ईश्वर से याचना | ईश्वर से प्रेम संवाद
मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ, शिष्य – प्रोफेसर औतार लाल मीणा
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

