Tuesday, May 28, 2024

Meaning of Mental State | नई सुबह का इंतजार

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नई सुबह का इंतजार | मानसिक स्थिति का मतलब
Meaning of Mental State | Definition of Mental State | Mansik Sthiti Ka Matalab

आज फिर मुझे एक नई सुबह का इंतजार है,
तो फिर मैं कैसे जिक्र करूँ कि जीवन में जश्ने बहार है ;
जख्म दिये हैं न जाने कितने अपने चाहने वालों के दामन में,
तो फिर मैं कैसे मान लूँ कि किसी का दिल मेरे लिए बेकरार है ;

आज फिर मुझे एक नई सुबह का इंतजार है….

उम्मीद की रोशनी ने भी जब साथ छोड़ने का फ़ैसला कर ही लिया है,
तो फिर मैं कैसे सोचूँ कि सफलता दरवाजे पर खड़ी होकर कर रही मेरा ही इंतजार है ;
चन्दा की रोशनी में भी जब साये ने पीछा छुड़ाने का फैसला कर ही लिया हो,
तो फिर मैं कैसे इतराऊँ कि कोई मेरे साथ कदम से कदमताल करने को कोई भी तैयार है ;

आज फिर मुझे एक नई सुबह का इंतजार है….

संघर्ष का जज़्बा भी मैदान छोड़ जब भागने की फिराक में लगा हो,
तो फिर मैं कैसे जान लूँ कि कठिनाइयों के पश्चात भी मेरे लिये एक उज्ज्वल संसार है ;
तहजीब भी लड़खड़ाते हुए जब भटक रही हो जो दर बदर ,
तो फिर मैं कैसे इठलाऊँ और कमर का बलखाऊँ कि मुझ पर दिलो जान छिड़कर और गले में हार भी सजाने का रखता कोई खुमार है ;

आज फिर मुझे एक नई सुबह का इंतजार है….

आँख का नूर भी जब अधेड़ उम्र में रोशनी लौटाने में बगावती तेवर इख्तियार कर रहा हो,
तो फिर मैं कैसे भ्रम में रहूँ कि कोई दीया बनकर मेरे हर हर्फ़ को बेमिसाल करने वास्ते बाती में जलने वाला कोई तो बखुर्दार है,
ईमान जब डोलने लगे यह सोचकर  की कौनसा अजूबा है तो तू ही एक इस ख़ुदा की जमी पर ,
तो फिर मैं कैसे फख्र करूँ कि कोई मस्ताना मेरे जीवन की नैया को पार लगवाने वास्ते बनने वाला मेरा भी सरमायेदार है।

आज फिर मुझे एक नई सुबह का इंतजार है,
तो फिर मैं कैसे जिक्र करूँ कि जीवन में जश्ने बहार है……

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नई सुबह का इंतजार | मानसिक स्थिति का मतलब

मानस जिले सिंह
【यथार्थवादी विचारक 】
अनुयायी – मानस पंथ
उद्देश्य – मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु प्रकृति के नियमों का यथार्थ प्रस्तुतीकरण में संकल्पबद्ध योगदान देना।

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Sarla Jangir
Sarla jangir
1 year ago

देखो तो वह उगता सूरज,
 स्वागत तुम्हारा कर रहा ।
रोशनी उसके जीवन देने वाली,
 नई उमंगे वह भर रहा ।
 भविष्य के सपने जो तुमने कल संजोए,
 आज वह दिनकर पूरा कर रहा।
 सूर्य के लालिमा का वह रंग,
 चेहरे पर तेरे भर रहा ।
किस सुबह के इंतजार में,
 तू अपनी कोशिश कर रहा ।
परवश होकर तेरे कर्म की आगे,
मार्ग तेरा प्रशस्त कर रहा ।- प्रोफेसर सरला जांगिड़

Sanjay Nimiwal
Sanjay
1 year ago

बहुत खूब 🙏👌🙏

सुबह सवेरे सूरज का साथ है,
चहकते हुए पंछियों की मधुर आवाज है।
हाथ में चाय का प्याला,,
और यादों में कोई खास है।।
गुजरेगा यह दिन भी खुशनुमा,,,
क्योंकि मुझे मेरे अपनों का हरदम साथ है।।।

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